Sunday, September 11, 2011

मै कौन हूं

जो सुनहरी धूप के पीछे छुपे हुए अंधेरे को देख पाते, तो तुम जान लेते की मै कौन हूं,
सुन पाते जो तुम अंधेरे मे थपेडे खाती लहरों की वो मध्य सी अवाज तो तुम जान लेते की मै कौन हूं,
जो क्षितिज से आगे तुमहारी नजर देख पाती तो तुम जान लेते की मै कौन हूं,
इस शोर के बीच गुम ऊस तन्हाई को महसूस कर पाते तो तुम जान लेते की मै कौन हूं,
जो सुन पातें तुम वो अन –कही बातें , गीले होटो से निकली तुमहारे लिए वो हर दुआ, तो तुम जान लेते की मै कौन हूं,
समझ पाते जो तुम ओझळ होती वो बच्पन की चमक , तो तुम जान लेते की मै कौन हूं,
जो जान पाते तुम ऊस ओस की बूंद का लक्ष्य , तो जान लेते की मै कौन हूं,
महसूस कर पाते जो तुमहें पाने की कशिश ,तो जान लेते की मै कौन हूं,
गर गीरा सकते जो तुम द्वेष की दीवार तो कुछ आगे भी देख पाते, आंखों पर पडा परदा जो सरकता तो कुछ दूर ऑर देख पाते
ऊन झुकी हुई पळको से अगर तुम देख पाते, तो तुम जान लेते की मै कौन हूं,
होता जो मुझ पर थोडा सा भरोसा तो हात थाम तुम भी साथ- साथ आते
नशा मेरी आंखों मै देखा होता तो हात थाम तुम भी साथ-साथ आते  
( 2 the one ....Precious)